एड्स का रोग - निदान एवं उपचार (Diagnosis and treatment of AIDS in hindi) HIV के संक्रमण की पहचान अर्थात् रोग निदान वैसे तो इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा वीर्य, योनिस्राव, लार, दुग्ध, रुधिर, आदि तरल पदार्थों में वाइरस की उपस्थिति से की जा सकती है, परन्तु वैज्ञानिकों ने इसकी सरल, रासायनिक जाँच की विधियों का आविष्कार कर लिया है। संक्रमित T, लिम्फोसाइट्स में, HIV के कुछ जीन्स के नियन्त्रण में , कुछ ऐसी प्रतिजन प्रोटीन्स (antigenic proteins) संश्लेषित होकर रुधिर में मुक्त होती हैं जिन्हें निष्क्रिय करने के लिए शरीर के प्रतिरक्षण तन्त्र में उपयुक्त प्रतिरक्षी (antibodies) प्रोटीन्स बनती हैं। रुधिर में इन्हीं प्रतिरक्षी प्रोटीन्स की उपस्थिति अनुपस्थिति की सीरमी जाँच (serological test) द्वारा पता लगाकर HIV का संक्रमण होने न होने का निर्धारण किया जाता है। वैज्ञानिकों ने इन प्रतिरक्षियों की सीरमी जाँच के लिए ELISA किट (एन्जाइम सहलग्न प्रतिरोधी शोषक जाँच किट – Enzyme Linked Immuno Sorbent Assay Kit) बनाया है। इस जाँच में सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका क्षारीय फॉस्फेटेज (alkaline phosph...
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